...और बरसों बाद
जब मैंने वह किताब खोली
वहां अब भी बचे थे
उस फूल के कूछ जर्द पड़े हिस्से
जो तुमने कालेज से लौटते हुए
मुझे दिया था
हां, बरसों बीत गए
लेकिन अब भी बाकी है
तुम्हारी यादों की तरह ही
इस फूल की खुशबू
अब भी बाकी है
इन पंखुडि़यों पर
तुम्हारे मरमरीं हाथों का
वह हसीं लमस
वक्त के चेहरे पे
गहराती झुर्रियों के बीच
मैं चुनता रहता हूं
तुम्हारी यादों के फुल
कभी आओ तो दिखाएं
दिल के हर गोशे में
मौजूद हो तुम
बरसों बाद जब मैंने ...


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