अगर छुट्टी हो, कोई काम नहीं, दिमाग भी खाली तो ज़िंदगी के पन्ने पलटिए, शायद सुखद एहसास हो.
Friday, February 19, 2010
सफ़र भी मैनेजमेंट हो गया है
इतनी भीड़ है कि इतनी भीड़ है कि सफ़र भी मैनेजमेंट हो गया है. दायें से निकल कर बायें और बायें से फिसल कर दायें। हार्न का शोर। मैनेज करना ज़रूरी है मंज़िल तक पहुंचने के लिए। वर्ना यू टर्न से घर लौट आने का रास्ता बंद तो नहीं लेकिन पहुंच कर बंद ही हो जाता है। चलते रहने के भ्रम में जाम में फंसे यात्री की आत्मकथा क्यों होती होगी।
Price Hike
Dear Mr FriendPls Read and convey to all Nata jeeसुबह सैर को निकला, दिल में कुछ अरमान थे, एक तरफ जंगल तो दूसरी शमशान थे मैं शमशान की ओर चला, चलते चलते मेरे कदम इक हड्डी पर टिके, हड्डी के ये बयान थे, चलने वाले देखकर चल इक दिन हम भी इंसान थे so think about us ..they ar also aam adam early......
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